Gold-Silver Rates: सोने-चांदी के दाम भरभरा कर गिरे, आज 24 नवंबर को आपके शहर में क्या चल रहा भाव?Gold Silver Rates Fall: 22 कैरेट सोने की बात करें तो इसका भाव करीब 2,500 रुपये कम होकर 1,12,802 रुपये/ 10 ग्राम हो गया है. वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,200 रुपये कम होकर 92,360 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. सिल्वर और 24 कैरेट गोल्ड के भाव भी जानिए.
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Gold-Silver Prices Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में बड़ा उछाल आया है और इसने लगातार रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाए हैं. वहीं दिवाली के बाद से गोल्ड-सिल्वर के भाव में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. पिछले हफ्ते की बात करें तो सोने-चांदी के दाम 8,300 रुपये तक गिरे हैं. खास तौर से चांदी में बड़ी गिरावट देखी गई है. 24 नवंबर, 2025 को सोने का भाव 1,600 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 1,23,150 रुपये/10 ग्राम के करीब चल रहा है, जबकि चांदी में 8,200 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखी गई है और ये 1,51,000 रुपये/किलो के करीब चल रहा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई है. कॉमेक्स पर भी सोने की कीमत कम होकर 4,080 डॉलर/औंस और चांदी की कीमत कम होकर करीब 50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है.
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एक हफ्ते में दिखी बड़ी गिरावट!
सोना और चांदी की कीमतों में पिछले हफ्ते बड़ी गिरावट देखने को मिली है और दाम करीब 8,300 रुपये तक कम हो गए हैं. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 1,23,146 रुपये है, जबकि एक हफ्ते पहले ये 1,24,794 रुपये थी. ये सोने की कीमत में 1,648 रुपये की गिरावट दिखाता है.
22 कैरेट सोने की बात करें तो इसका भाव करीब 2,500 रुपये कम होकर 1,12,802 रुपये/ 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,14,311 रुपये था. वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत 93,596 रुपये/ 10 ग्राम से करीब 1,200 रुपये कम होकर 92,360 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. इसी एक हफ्ते के भीतर चांदी की कीमत 8,238 रुपये कम होकर 1,51,129 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 1,59,367 रुपये प्रति किलो थी.
इन वजहों से कम हुई सोने-चांदी की कीमतें?
सोने और चांदी की कीमतों में कमी की एक वजह वैश्विक स्तर पर तनाव कम होना. वहीं, अमेरिकी सरकार की ओर से कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर टैरिफ कम होने से भी सोने और चांदी पर दबाव बढ़ा है. इसके अलावा अमेरिका में दिसंबर में ब्याज दर कटौती की कम संभावना ने भी सोने पर दबाव बढ़ाना काम किया है.
आगे कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल?
जानकारों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर प्रदर्शन के कारण घरेलू बाजार में सोने के दाम वैश्विक बाजार के मुकाबले कम गिरे हैं. अमेरिका में नॉन-फार्म पेरोल डेटा के उम्मीद से अधिक मजबूत आने के कारण ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हुई है. ऐसे में मिलेजुले संकेतों के कारण सोने पर दबाव देखने को मिल सकता है. सोना 1.20 लाख रुपये से 1.24 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की रेंज में रह सकता है.
विशेषज्ञों का विश्लेषण!
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मेहता इक्विटीज के उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने बाजार की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोना इस वर्ष अपने सबसे मजबूत वार्षिक प्रदर्शन की दिशा में अग्रसर है। केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग इसके प्रमुख कारण हैं। कलंत्री ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के जारी होने तक धातु में अस्थिरता बनी रह सकती है।
निर्मल बैंग सिक्योरिटीज के वीपी कुणाल शाह ने एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका कहना है कि वर्तमान में सोना एक उच्च जोखिम वाले परिसंपत्ति वर्ग की तरह व्यवहार कर रहा है। जब कोई भी परिसंपत्ति नए स्तर बनाने के करीब होती है, चाहे वह ऊपर की ओर हो या नीचे की ओर, तो समेकन की अवधि देखी जाती है। शाह के अनुसार, सोना भी वर्तमान में इसी चरण से गुजर रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह!
बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सोने और चांदी में निवेश करते समय सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। वर्तमान बाजार परिदृश्य में आक्रामक निवेश रणनीति अपनाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने निवेश में संतुलन बनाए रखें और बाजार की चाल को ध्यान से देखते रहें। एक विविधीकृत पोर्टफोलियो रखना इस समय सबसे बुद्धिमानी भरा निर्णय हो सकता है।
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विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक थोड़ी-थोड़ी मात्रा में नियमित निवेश करने की रणनीति अपनाएं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का औसत प्रभाव प्राप्त होता है और जोखिम कम होता है। साथ ही, अपनी वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करना महत्वपूर्ण है।
आने वाले सप्ताहों में सोने के बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। फेड की नीतिगत दिशा स्पष्ट होने के बाद ही बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है। मुद्रास्फीति के आंकड़े, रोजगार डेटा और विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर सोने की कीमतें किसी भी दिशा में बड़ा उछाल ले सकती हैं।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखें तो सोने के लिए संभावनाएं अभी भी सकारात्मक बनी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितताएं, व्यापार युद्ध की आशंकाएं, और भू-राजनीतिक तनाव सोने की मांग को मजबूत बनाए रखने वाले कारक हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चालू वर्ष में सोना अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन को बनाए रख सकता है, बशर्ते कोई बड़ी वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल न हो।
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